#सतर्कता

मैं यह भूल नहीं सकता की, हमारे साथ इतना अत्याचार हुआ है, जीवन हमें प्रेम सिखाता है, पर भी मैंने अनेक बार विदेशी शब्द का उपयोग किया है | विचारों की वास्तविक ही जीवन है, यह वास्तविकता नजर आता है, लेकिन विचार तो कर्म करने के लिए कहता है, इसलिए …

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#दोस्त

दोस्ती विचारों से की जाती है | विचारों के मेल का नाम ही दोस्ती है | इसलिए जो अपने विचार का नहीं, ओ अपना कैसा दोस्त, और जब विचार ही बदल गया तो, दोस्ती कैसा | उदाहरण लेते है- अगर आपका कोई बहुत प्रिय दोस्त है, और आपको एक दिन …

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#बड़ों के बीच में न बोल

आपने अक्सर सुना होगा, जब दो बडें आपस में बोल रहे हों, तो बीच में नहीं बोलना चाहिए | यह बहुत बड़ी तर्क पूर्ण ज्ञान की बात है, इसे समझना आवश्यक है | यहाँ पर दो बड़ों का अर्थ समझदार लोगों से है, जो किसी भी विषय में खास बात …

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#तर्क वादी बच्चा और आज का समाज

दो से तीन साल के बच्चे से पूछो, हनुमान की मूर्ति को दिखाकर, वह बताएगा यह बन्दर है | आप बच्चे को मंदिर ले जाओ, आप देवता कहोगे, वह बच्चा पत्थर कहेगा | उस बच्चे को गणेश को दिखाओ, वह कहेगा हांथी है | वह जो वास्तविक है, बच्चा वहीँ …

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#मानव की भावना

अपना कार्य आप इस प्रकार से करों, कि किसी की भावना ठेस न पहुचे, कहीं ऐसा न हो, की जो आपके अपने हैं, वही आपसे दूर हो जाए, आपको समझदारी से कार्य लेना है | अपनी ही बात को श्रेष्ठ बतलाने का प्रयास न करें, सामने वाले की भावना को …

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#समाज सुधार में, अपनों का साथ

समाज सुधार का कार्य करना इतना आसन नहीं है, हर कोई आपके विचारों से अवगत नहीं हो सकता, ओ मज़बूरी की बात करेंगे, जिससे उम्मीद करोगे, वही साथ छोड़ देगा | यह समाज तुम्हारी परीक्षा लेगा, की क्या समाज को सुधारने के वास्तव में लायक हो, तुम्हारे पास कितना ज्ञान …

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#सामाजिक प्रथा, नियम, और सुधार

यह मुमकिन नहीं है, कि सभी गाँव को एक साथ सुधारा जा सके, इसलिए हर छेत्र में किसी ऐसे गाँव को केंद्र माना जाए और उस गाँव से ब्राम्हणवाद को सभी मिलकर मुक्त करें, और सभी इस गाँव से कुछ सीखे | क्योंकि लोगों को नहीं पता होता, किस नियम …

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कोई भी विदेशी #मोक्ष नहीं चाहता

क्योंकि उसे पता है, परमात्मा निराकार है, वह जन्म नहीं ले सकता, और कोई भी कथा कहानी सुनने से मोक्ष नहीं मिलता, बल्कि कर्म से होता है | कर्म का सम्बन्ध मन से है, जिसका मन पवित्र है, उसी को मोक्ष मिलता है | और जिसका मन पवित्र नहीं है, …

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#हिन्दू कौन ?

ब्रम्हा ने अपने मुख से ब्राम्हण, छाती से क्षत्रिय, पेट से वैश्य, और पैर से शुद्र को बनाया | इस तरह से चार वर्ण का व्यवस्था का निर्माण किया | तो सबसे पहले ब्रम्हा आते है, उसके बाद दुसरे में वर्ण आता है, और वर्ण के अनुसार देवताओं की सेवा …

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#मूलनिवासियों को धर्म में बाँटने की चाल

आज के समय में बहुत कम लोग ही जानते है, की हिन्दू धर्म से ही, 100 से अधिक नए धर्मो की मांग चल रही है, यह वह पंथ है, जो अपने आप को हिन्दू नहीं मानती है, न ही देवी-देवताओं की पूजा करती है | और न ही ब्राम्हणवाद को …

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