मूर्ति पूजा, जीव पूजा, चित्र पूजा, पत्थर पूजा, चिन्ह पूजा क्या है ? समझिये

इस लेख में आप जानेगे, की अनेक प्रकार के पूजा पाठ क्या होता है |

मूरत किसे कहते है ?

परिभाषा / अर्थ

किसी की आकृति के अनुरूप गढ़ी हुई आकृति को मूरत कहते है |

उदाहरण

किसी भी प्रकार की मूर्ति बना लेता है ।

मूर्ति पूजा किसे कहते है ?

किसी चीज की आकृति बनाकर पूजा करना मूर्ति पूजा है |

चित्र किसे कहते है ?

तस्वीर, फोटो, कागज से बनी, चीजो को चित्र कहते है |

चित्र पूजा किसे कहते है ?

किसी चीज में अंकित, जैसे दीवाल, या फोटो, इस तरह की चीज में रंग से बनी हो, उनकी पूजा करना चित्र पूजा है |

पत्थर क्या है ?

निर्जीव ठोस चीज, मिट्टी से कठोर चीज को पत्थर है |

पत्थर पूजा क्या है ?

बिना मूरत अंकित, जिसमे कुछ दिखाई न दे रहा हो, यह पत्थर पूजा है |

चिन्ह क्या है ?

किसी भी चीज से बने आकर को चिन्ह कहते है |

चिन्ह पूजा क्या है ?

किसी भी आकर चीज की पूजा करना चिन्ह पूजा है, चिन्ह पूजा मानव की मूरत नहीं हो सकता |

जीव क्या है ?

जिसमे जीवन होता है, वही जीव है |

जीव पूजा क्या है ?

जीवित जीव की पूजा करना जीव पूजा है |

आत्म क्या है ?

आत्म अर्थात स्वंम जीवित शरीर, आत्म और आत्मा दोनों अलग है,

आत्म को देख सकते है |

आत्मा को नहीं देख सकते |

आत्म पूजा क्या है ?

आत्म पूजा नहीं किया जाता, बल्कि आत्म का, अर्थात शरीर का ध्यान किया जाता है |

तत्व पूजा के अन्तर्गत ही सभी पूजा आते है, लेकिन सबसे सर्वोत्तम पूजा

न जीव, न निर्जीव,

न मूरत, न चित्र,

न पत्थर, न चिन्ह, है |

ध्यान ही सर्वोत्तम है,

उदाहरण,

शंकर घलो बैठे बैठे जपे सतनामा ल |

गौतम ने भी ध्यान लगाया |

गुरुघासीदास बाबा ने भी ध्यान लगाया था |

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