मानव अपने जीवन कैसे जी रहा है?

मानव अपने जीवन को बहुत ही शान से जी रहा है। जीने में ये मानव तो जानवर से भी आगे है, शेर भी किसी जानवर को खाता है, तो यह देखता है, खाने लायक हुआ है या नहीं! सीधे बच्चे को नहीं खा जाता है। अनेक प्रकार से आतंक नहीं मचाता कि सब सर्वनाश हो जाए। इस मानव के पेट में इतना भूख है, किसी भी जीव को न खाने के बारे में नहीं सोचता। जीवन जीने में बहुत माहिर है, जब पेड़ लगाने बारी आएगी, तो इतरायेंगे। लेकिन पेड़ को जलाने के हर गाँव में आयोजन करेंगे।

पेड़ उजाड़ दिया, जंगल उखाड़ दिया, सभी ओर शोर ही शोर है, पीने के पानी तक को गन्दा कर डाला, सभी कुआँ को बंद कर दिया, कचरा पेटी बना दिया, फसल रसायन से बर्बाद हो गया, वायु धुआँ- धुआँ हो गया। कभी सोचा है मूर्ख, नहाने के पानी राख को डालता है, और ख़ुशी मनाता है। जब बिमार पड़ता है, तो भी यह अकल नहीं आता कि इसका कारण क्या है। प्रथा के नाम पर सब बर्बाद करके रख दिया। इतना सुन्दर प्रकृति क्या से क्या कर डाला। ओजोन परत को भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। सुधर जा सबसे बुद्धिमान जीव, मानव होने का सबूत दे।

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