जीवन क्या है ,परिवर्तन का नाम ही जीवन है |

इस प्रश्न का उत्तर उस व्यक्ति के मन में जरुर आता है, जो वास्तव में जीवन को समझना चाहते है, और सही तरीके से समझकर जीवन को जीना चाहते है, वास्तव में जीवन किसे कहते है,

मेरे अनुसार से मै कहना चाहूँगा, “परिवर्तन का नाम ही जीवन है” |

प्रायः सभी यही कहते है, की जिस जीव में जीवन पाया जाता है, उसी के लिए जीवन है, लेकिन यह वास्तव में सत्य नहीं है,

क्योकि अगर पत्थर में जीवन नहीं होता है, अगर इसे जीवन की श्रेणी से हटा दे, तो यह कुछ नहीं रहेगा |

लेकिन अगर सभी चीजो को अगर परिवर्तन की दृष्टी से देखते है, तो जीवन स्वतः दिखाई देने लगता है,

अगर हमें जीवन को जानना है, तो सबसे पहले स्वंम को जानना आवश्यक है, मै हर पल कर्म करता हूँ, मै हर पल जीवन जीता हूँ, मेरा जन्म कैसे हुआ, जो वास्तव में सत्य है, इसको समझकर आगे बढ़ेंगे, तो जीवन की समझ के नजदीक जल्दी पहुँच जायेंगे,

प्रकृति का नियम ही, जीवन का समझ है,

जीवन और कर्म एक दुसरे के पूरक है, क्योकि जीव और निर्जीव स्वंम से या प्रकृति के कर्म और परिवर्तन जरुर होता है,

जीवन को समझने के लिए, प्रकृति और स्वंम को समझना आवश्यक है, और इसे समझने के लिए, सभी को इतिहास में जाने की आवश्यकता है,

समझने वाली बात तो यह है की व्यक्ति जैसा समझता है, वैसा ही जीवन को समझकर मानकर जीने लगता है,

“अगर किसी को जीवन वास्तव में जीना है, तो प्रकृति की वास्तविकता को स्वीकार करना आवश्यक है “ |

प्रारंभ में सूर्य को सभी देवता समझते थे, लेकिन अब ज्ञात हो गया है, यह गैस का गोला है, इसी तरह से व्यक्ति यही समझते थे, की सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा करता है, लेकिन वास्तव में ज्ञात हुआ की, पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करता है, जब कोई नहीं जानता था, की पृथ्वी गोल है, तो सभी उस समय यही मानते थे, की पृथ्वी सपाट है, लेकिन उसके बाद जब वास्तविकता का ज्ञात हुआ, तो सभी की समझ बदल गई,

जीवन को समझने के लिए अपने आप को जानने की जरुरत है, इसके बारे में अगली लेख में बात करेंगे |

धन्यवाद्

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