#मानव की भावना

अपना कार्य आप इस प्रकार से करों, कि किसी की भावना ठेस न पहुचे, कहीं ऐसा न हो, की जो आपके अपने हैं, वही आपसे दूर हो जाए, आपको समझदारी से कार्य लेना है | अपनी ही बात को श्रेष्ठ बतलाने का प्रयास न करें, सामने वाले की भावना को …

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#समाज सुधार में, अपनों का साथ

समाज सुधार का कार्य करना इतना आसन नहीं है, हर कोई आपके विचारों से अवगत नहीं हो सकता, ओ मज़बूरी की बात करेंगे, जिससे उम्मीद करोगे, वही साथ छोड़ देगा | यह समाज तुम्हारी परीक्षा लेगा, की क्या समाज को सुधारने के वास्तव में लायक हो, तुम्हारे पास कितना ज्ञान …

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#सामाजिक प्रथा, नियम, और सुधार

यह मुमकिन नहीं है, कि सभी गाँव को एक साथ सुधारा जा सके, इसलिए हर छेत्र में किसी ऐसे गाँव को केंद्र माना जाए और उस गाँव से ब्राम्हणवाद को सभी मिलकर मुक्त करें, और सभी इस गाँव से कुछ सीखे | क्योंकि लोगों को नहीं पता होता, किस नियम …

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कोई भी विदेशी #मोक्ष नहीं चाहता

क्योंकि उसे पता है, परमात्मा निराकार है, वह जन्म नहीं ले सकता, और कोई भी कथा कहानी सुनने से मोक्ष नहीं मिलता, बल्कि कर्म से होता है | कर्म का सम्बन्ध मन से है, जिसका मन पवित्र है, उसी को मोक्ष मिलता है | और जिसका मन पवित्र नहीं है, …

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#हिन्दू कौन ?

ब्रम्हा ने अपने मुख से ब्राम्हण, छाती से क्षत्रिय, पेट से वैश्य, और पैर से शुद्र को बनाया | इस तरह से चार वर्ण का व्यवस्था का निर्माण किया | तो सबसे पहले ब्रम्हा आते है, उसके बाद दुसरे में वर्ण आता है, और वर्ण के अनुसार देवताओं की सेवा …

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#मूलनिवासियों को धर्म में बाँटने की चाल

आज के समय में बहुत कम लोग ही जानते है, की हिन्दू धर्म से ही, 100 से अधिक नए धर्मो की मांग चल रही है, यह वह पंथ है, जो अपने आप को हिन्दू नहीं मानती है, न ही देवी-देवताओं की पूजा करती है | और न ही ब्राम्हणवाद को …

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#जागरूक_बनो, #शिक्षित_रहो, #संगठित_रहो, #संघर्ष_करों

बाबा साहेब अम्बेडकर ने मार्ग बताया है | लोगों को पहले जागरूक करो | जब जागरूक होगा, तो शिक्षा का महत्व समझेगा, पढाई करेगा | उसके बाद तर्क लगाएगा | अपने जीवन में लागू करेगा तो शिक्षित बनेगा | शिक्षित लोगों को संगठित करना | और अंतिम में संगठित लोग …

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#गुस्सा, ज्ञान, समझदारी, और बुध्दि

मुझे पता है, इस पुस्तक को पड़ने के बाद आपका दिमाग हिल गया होगा, गुस्सा अंग-अंग में फड़क रहा है | लेकिन गुस्सा किस पर आ रहा है, इस गुस्से को अपने पास रखो, जायदा गुस्सा सोचने नहीं देता, समझदारी लाओ, और पहले अपने आप को सुधारों, आप भी औरो …

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#संगठन ?

किसी भी उद्देश्य की पूर्ति के लिए, लोगों का आपस में जुड़े हुए होना, संगठन है | आज समाज की उन्नति के लिए हजारों संगठन बनी हुई है, और बहुत अच्छे तरीके से कार्य भी कर रहे है | मगर कुछ ऐसे संगठन की भी आवश्यता है, जो जनहित ऊँचा …

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#नेतृत्व और नेतृत्व कर्ता क्यों ?

नेतृत्व अर्थात किसी, संगठन, समिति, समाज, धर्म, पंत, को चाहे कुछ भी रास्ता दिखाने वाला, यह कोई जरुरी नहीं है, की नेतृत्व सिर्फ मानव को ही करना आता है, हर जीव करता है, उदाहरण के लिए हांथी के झुण्ड को ले लेवें हर झुण्ड में एक नेतृत्व कर्ता मिल जायेगा …

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