मूलनिवासी समाज की समस्या का कारण

आज का ओ दौर है, जब विदेशी अपनी गुलामी नीति को जन-जन तक पहुचाने के लिए लगे है |

इसी के दौर में सबसे बड़ी साजिस धर्म है |

जब संविधान बना तो, तो उससे पहले इन विदेशियों ने पुरे भारत वर्ष की सत्ता को वर्ण व्यवस्था के माध्यम से गुलाम बना लिया था, और शोषण लगातार कर रहे थे |

जब अंग्रेज लोग आये तो उन्होंने इस देश की व्यवस्था को देखा, जो पहले से चली आ रही थी |

और पहली बार जाति गत जनगणना की, और पाया की ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, लोगो ने मूलनिवासी पर बहुत अत्याचार किया है, और जाति की उत्पत्ति की है |

जब संविधान बना तो शोषण के आधार पर केटेगरी का विभाजन हुआ, जिसके अंतर्गत चार भाग में बांटे गए |

शोषित, अतिशोषित, पिछड़ा, और सामान्य |

जिसके आधार पर चार कटेगरी का निर्माण हुआ |

शोषित SC, अतिशोषित ST,  पिछड़े लोग OBC, सामान्य में General.

आज की समस्या यह यह चूँकि इनका शोषण धार्मिक आधार पर हुआ था, इसलिये धर्म के आधार पर, शोषण के आधार पर आरक्षण दिया गया, और पुराना धर्म हिन्दू हुआ |

आज की समस्या यह यह ST, SC, OBC, अपने आप को हिन्दू घोषित करने में लगे हुए है, और इनको पता ही नहीं है, इनको जबरदस्ती हिन्दू वादी प्रथा में फंसाया जा रहा है |

इन मूलनिवासियों को आगे किया जा रहा है, लेकिन मालिक तो विदेशी ही है |

मै पूछता हूँ, कोई एक परिवार बता दो, जो यह कहे मेरा परिवार 100 वर्ष से देवी देवता की पूजा करता आया हो |

नहीं मिलेगा, जो भी शुरू हुआ है, अभी-अभी शुरू हुआ है, लेकिन यह शुरू कैसे हुआ, और बढ़ क्यों रहा है |

इसका कारण यह है, ब्राम्हणवादी लोगों ने कोई आयोजन किया, और मूलनिवासी लोग वहां पहुँचे और कार्यक्रम देखने लगे |

आज भी तो यही हो रहा है, लोग यह समझकर जाते है, की कही पर कुछ हो रहा है, भाईचारा है, लेकिन समस्या यहाँ पर नहीं, समस्या तो अगली पीढ़ी की बच्चे की है, जिसको नहीं पता की आप भाईचारा से गए थे, और बच्चा अपना जड़, अपना वजूद, अपना इतिहास समझ के जा रहा है, और अपना हक़ जता रहा है |

ये मूलनिवासी समाज देखा-देखि में समाज को, अपने परिवार को, को डूबा दिए |

आज ये मानने को तैयार ही नहीं है, इनको साजिस के तहत ये पूजा पाठ में फंसाया जा रहा है |

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