#मेरा बंधन

आप लोग भी उतने ही समझदार हैं, जितना मैं,

आप लोग भी वैसे है, जैसे मैं,

आप लोग भी वैसे कर्म करते है, जैसे मैं,

फर्क बस इतना है, मैं समय के साथ कुछ आगे बढ़ गया हूँ |

और मैं देख रहा हूँ, आप भटक-भटक कर थक-थक कर चल रहे है |

जी करता है, आपको सीधे पकड़ कर पास ले आऊँ |

लेकिन मुझे याद आ जाता है, मानव-मानव एक समान |

मैं अगर आपको सीधे पकड़ कर पास ले आया तो, इसमें आपमें जड़ता आ जाएगी, आपके दिमाग का उपयोग नहीं हो रहा है, और आप जीने आये है | आपको भी समझ आना चाहिए क्या हो रहा है |

इसलिए मैं बंधन से मजबूर हूँ, आपको प्रेम से बता सकता हूँ, कहो तो समझा सकता हूँ, लेकिन जबरदस्ती नहीं कर सकता, चाहे कुछ भी हो जाए |

मैं आपको, आपकी स्वेच्छा पर छोड़ छोड़ता हूँ, क्योंकि जो जीवन आपने देखा है, उसका उपयोग भी तो आपको करना है…नहीं तो आपका दिमाग क्या काम का..

अपनी ही जिद करने से कुछ नहीं होने वाला..जरा समझो समझदार हो…आप संसार के सबसे बुद्धिमान ज्ञानी जीव हो…

यह “राजनीति क्या है ?” पुस्तक यही समाप्त होता है |

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