#कुछ समझ आया

हे मानव समाज, आज हम यहाँ तक, हजारों वर्षो की पीड़ा को सहकर पहुंचे है, हमें धन रखने का अधिकार नहीं, लाचारी में जिए है, ज्ञान का अधिकार नहीं, सती प्रथा, अग्नि प्रथा, बाल विवाह, देवदासी, यहाँ तक के कपड़े पहनने तक का अधिकार नहीं, पानी पीने तक का अधिकार नहीं, जमीन में चरण चिन्ह न पड़े इसके लिए कमर में झाड़ू, जाति-पाति, अपृश्यता, छुआ-छूत, यहाँ तक के शुद्रों के पहले बच्चे को गंगा में डुबोकर मार दिया जाता था, स्पष्टीकरण पहला बच्चा ताकतवर होता है, संघर्ष को रोकने के लिए, और न जाने क्या-क्या बताऊँ |

कुछ समझों इन्ही में वापस जाना है क्या, या कुछ करना है |

अगर आज बाबा साहब न होते, और जितने महापुरुष, संत न होते तो क्या होता, और खास करके वे जो आज लगातार संघर्ष कर रहे है, आप ये सब न होते तो न जाने क्या होता |

आज जो भी है, सब शिक्षा की वजह से है |

( स्पष्टीकरण:- समझदारी लाओं, शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करों – बाबा साहेब अम्बेडकर | )

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