जीवन को कैसे जीना चाहिये ?

प्रकृति ने हमें ओ सब कुछ दिया है, जिससे हम अपनी जीवन को अच्छे से जी सके |

सुनने के लिए कान, देखने के लिए आँख, बोलने के लिए मुह, और इन सबको संग्रहण करने के लिए दिमाग और दिमाग को चलाने के लिए मन और बुध्धि, फिर हम अपनी तर्क और बुध्धि से क्यों नहीं जी पाते |

क्या किसी ने हमारी बुध्धि से खेलने का साहस किया है, हमें सोचने तक नहीं दिया है, हमारे भारत देश में ही इतनी मुर्खता क्यों है, और किसी देश में क्यों नहीं, क्या आप जानते है बचपन से ही काल्पनिक कहानियो के माध्यम से आपके दिमाग को ख़राब करके मुर्ख बना दिया जाता है |

और बड़ा होकर भी हम उसी को सही समझते रहते है, और अपने बच्चो को भी उसी मुर्खता पूर्ण कहानी को सुनाकर मुर्ख बना बैठते है, और आशा करते है मेरा बच्चा अच्छे से पढाई करेगा , जैसे क्या आपको लगता है, जो लिखा है वह सत्य है, क्या तुम्हे लगता है सूर्य को बजरंगबली, हनुमान निगल गए थे, अगर यह सत्य है तो सूर्य से ही तो सारा ब्रम्हांड चलता है, गुरुत्वाकर्षण से, फिर संसार नस्त क्यों नहीं हो गया, सूर्य को निगलने के बाद किसी भी दुसरे देश को कैसे कुछ मालूम नहीं हुआ,  और जब राक्षस ने पृथ्वी को चुराकर, पृथ्वी के ऊपर हाग मुतकार छिपा दिया था, इतनी बड़ी पृथ्वी को कहा छिपाया होगा, और क्या खाया होगा |

कभी सोचा है, कभी नर्क देखा हैम और स्वर्ग से किसी को आते जाते सुना है,

क्या आपको नहीं लगता की, आपको सत्य के साथ समझदारी से जीवन को जीना चाहिये, कुछ ढोंगी तुम्हे मुर्ख बनाने के लिए लगातार प्रयास करते रहते है, तुम्हे अनेक तरीको से डराते रहते है,

 कभी उन्से मेरे जैसा पुछोगो, शनि क्या होता है ?

अपना प्रभाव कैसे डालता है, कहा रहता है, आदमी है या पत्थर, या मुर्ख बनाने का ढंग, तुम्हारे पैसे लुटने के लिए यह सभी ढोंग फैला हुआ है, सोचना आपको स्वंम है, अपने बच्चो को मुर्ख डरपोक बनाना है या बाबा साहेब आंबेडकर की तरह जिन्होंने कभी भगवान को नहीं माना और पुरे देश का उद्धार कर दिया,

सोचना आपको फिर से है मुर्ख पंडितो के चक्कर में रहना है या समझदार होकर जिन्दगी को जीना है

                                                         – योगेन्द्र कुमार

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