आत्मा परमात्मा वाद क्या है ?

इस लेख को बड़े ध्यान से पढ़े आपका जीवन बदल जायेगा |

मानव के शरीर में, आत्मा होती है, और आत्मा का मालिक परमात्मा कहलाता है,

परमात्मा की नजर में सभी जीव एक समान होते है, उसके लिए सभी समान रूप से है,

जब आर्य विदेशी ब्राम्हण भारत आये तो, इन्होने ध्यान को बदलकर मूर्ति का रूप दिया, और परमात्मा के रूप में देवताओ को पेश किया |

ध्यान रहे यह बहुत गुण ज्ञान है एक झटके में समझ नहीं आएगा |

और पूजवाना शुरू कर दिया, इन ब्राम्हणों ने यहाँ के मूलनिवासी लोगो को मारे काटे, वर्ण व्यवस्था बनाया, मूलनिवासी को तोड़ने के लिए इतनी जाति बनाई की ये कभी एक न हो पाए |

इन विदेशियों ने क्या किया, जाति तो बनाई लेकिन जाति के अन्दर में अनेक प्रकार देवी देवताओ को फिट कर दिया की तेरा देवता ये है, इसका देवता ये है,

आज भी ये देवी देवता के गुलाम है |

इन ब्राम्हणों का मूल उद्धेश्य मूलनिवासी लोगो को गुलाम बनाना है, और अपना कार्य लेना है,

हिन्दू धर्म के अनुसार 33 कोटि देवता होते है ( कोटि = प्रकार ) अर्थात 33 प्रकार के देवता होते है |

कोई सिध्ध कर दे राम और कृष्ण को हिन्दू धर्म में देवता घोषित किया गया है |

इन्होने क्या किया राजा कृष्ण को देवता घोषित किया ग्रन्थ लिखकर, फिर ख़ुद प्रचार करने लगे, आज के समय में यही वंश यादव कहलाते है, अगर कृष्ण राजा है, तो फिर आज ये लोग गाय भैस क्यों चरा रहे है, वास्तव में, कृष्ण को ग्वाला बनाकर प्रचार कर रहे है, और प्रेम की लीला में डूबा रहे है, सोचो अगर कृष्ण देवता है, ये रावत भी देवता हुए, इन ब्राम्हण कन्याओ को विवाह करने में ब्राम्हणों को कोई आपति नहीं होनी चाहिये |

इसी तरह से धोबी जाति बनाया, अपने कपड़े साफ करवाने के लिए |

हिन्दू धर्म में मूर्ति पूजा का उल्लेख नहीं मिलता, अगर मिलता है तो बताओ महादेव ने किसकी पूजा की थी |

अगर कोई देवी देवता को मानता है, तो मानना होगा की, शरीर में आत्मा भी होता है,

भुत भी होते है |

और आत्मा मुक्ति भी जरुरी है, जिसे मोक्ष कहते है,

मोक्ष अर्थात मरने के बाद आत्मा का परमात्मा में मिल जाना, पुनर्जन्म न होना |

परमात्मा कैसा है |

सभी धर्मो में यही बताया गया है,

परमात्मा को किसी ने नहीं देखा, वह निराकार है, न उसका रंग है, न उसका रूप, न उसका नाम, न उसका, चिन्ह, उन्हें कोई देख नहीं सकता है |

कोई कह के बताये मैंने परमात्मा को देखा है |

इस अनुसार से देवी देवता परमात्मा नहीं हुए |

फिर इनकी पूजा क्यों की जाती है, यही तो भेद है,

हिन्दू धर्म में 33 प्रकार के देवता,

इन ब्राम्हणों का, लोगो को मानसिक गुलाम बनाना और धन सम्पति लुट लेना |

अगर लोगो की सेवा करना ही इनका कार्य है, और अगर ये देवता है तो फिर भीख क्यों मानते है, यही तो इनका ढोंग है |

इन्होने चार वर्ण बनाये है, जिसमे लिखा है मुख से ब्राम्हण पैदा लिया, क्षत्रिय छाती से, पेट से वैश्य, और पैर से शुद्र |

तो लड़का लिया था या लड़की, क्या भारत में ही लिया था,

जब ये ब्रम्हा कर्ता धर्ता है, यही सृष्टी के रचयता है तो बताओ, विदेश के लोग कहाँ से आये | जागो मूलनिवासी ST, SC, OBC,

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