आदिकाल का जीवन कैसा था |

प्रारम्भिक काल में अनेक प्रकार के जीव होते थे, उस समय जीव बहुत तेजी से बढ़ते थे, प्रारम्भिक में यह मानव आदि मानव कहलाता था |

करोड़ो वर्षो के संघर्ष के बाद आज मानव यहाँ तक इस सदी में पहुंचा है,

यह जीवन काल बिलकुल वैसा ही है, जैसा वैज्ञानिक शोध करके बता रहे है,

जैसे हमने लौह युग, कास्य युग, पहले यह मानव जानवर की तरह था,

आज भी हममे और जानवर में कोई जायदा अंतर नहीं है |

हम भी तो जानवर है, लेकिन हमने अपने आप को मानव का नाम दे दिया है,

पहले का जीवन काल, खाना के लिए संघर्ष करना, खंडरो, पहाड़ो, गुफाओ में रहना,

खाने के रूप में कंद, फल, फुल भोजन के रूप में लेते थे |

जब मानव जीवन की शुरुआत हुई थी, तो किसी प्रकार का कोई नियम नहीं था, लोगो का सिर्फ एक ही कार्य होता था, खाना के लिए संघर्ष, खानाबदोश जीवन,

उस समय, न भाषा था, न बोली था, न किसी का नाम था, न जाति था, न धर्म था, जानवरों की तरह आवाज निकालना |

धीरे-धीरे मानव विकाश की ओर बढ़ चला,

मानव सबसे बुध्धिमान जीव क्यों होता है |

निरन्तरता ही मानव को सबसे बुध्धिमान बनाता है,

शरीर का बनावट ही मानव को सबसे बुध्धिमान बनाता है,

मानव का शरीर सबसे लचीला होता है, किसी भी चीजो को बहुत आसानी से पकड़ सकता है |

कोई जन्म से कुछ भी नहीं है, बच्चा जन्म लेने के बाद असहाय होता है, ख़ुद ओ कुछ नहीं कर पाता, धीरे-धीरे उसका विकास होता जाता है, वह जन्म लेने के बाद से सीखता जाता है, आँखों से देखकर, कान से सुनकर, हांथो से छूकर, खाने का स्वाद लेकर, अपने अनुभव से सब कुछ सीखता है |

कोई मानव जन्म से बुध्धिमान नहीं होता है,

जीवन की इस परिभाषा को आपने समझ तो लिया लेकिन इस ज्ञान को हम अपने जीवन में किस तरह से लागु कर सकते है, इसको जानने के लिए, समझने के लिए जुड़े रहे

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